Serious men नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की मूवी ने मचाया धमाल |

serious men review in hindi: serious men आधारित है 2010 की नोवल serious men पर जिसके अन्दर आपको कहानी देखने को मिलती है एक ऐसे मिडल क्लास इंसान की जो चाहता है की उसका बेटा इस मिडल क्लास स्टेटस से ऊपर जाए. अब उसे मालुम पड़ता है की उसका जो बेटा है वो जीनियस है.

यह पता चलने के बाद nawazuddin siddiqui इस मौके को ना खोते हुए इसका पूरा फायदा उठाते हैं . और वह इस अवसर का फायदा किस तरह से उठाएंगे यह जाने के लिए आपको यह मूवी देखनी होगी जो की आपको Netflix पर देखने को मिलेगी.

इस मूवी का बैकग्राउंड इस मूवी को प्रेजेंट करने का तरीका एक दम अलग है और इसके बाद भी इस मूवी कुछ मुद्दों को बहुत अच्छे तरीके से दिखाया है जैसे जातिवाद का मुद्दा, धर्म की राजनीति, धर्म  के नाम पर इंसान को इंसान का दुश्मन बनाना  और सामाजिक विचारधारा यह सब चीजों पर काफी अच्छे से काम किया गया है.

मूवी के अन्दर नवाज़ुद्दीन के बेटे का रोले निभाया है अक्षत दास ने जिनकी एक्टिंग लाजवाब थी.उनका भोलापन उनके फेस एक्सप्रेशंस उनकी घबराहट हर चीज़ काफी ज्यादा अच्छी थी.

वैसे तो  Serious Men अपने नाम से एक दम उल्ट तस्वीर आपके सामने दिखाएगी. जिसमे नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी यानी मनी अपनी जिंदगी में से गरीबी हटाने के लिया दिमाग में खुराफाती प्लान बनाता नज़र आयेगा.

इस मूवी में  कही ना कही आपको अपनी काहानी भी नज़र आ सकती है जिस तरह हम सब अपने सपनो को पूरा करने के लिए जो संघर्ष करते हैं ठीक उसी तरह से एक आम आदमी को अपने सपने पुरे करने के लिए क्या क्या करना पड़ता वह काफी अच्छे तरीके से दिखाया गया है .

किस तरह से टैलेंट को स्क्रीन के सामने जोकर बना कर उसका तमाशा किया जाता है और इसके पीछे नोटों की गड्डियां किस तरह से बच्चे का भविष्य तय करती है इस चीज़ को भी बहुत अच्छे से दिखाया गया है. लेकिन सबसे बड़ी चीज़ है इंसान की मुर्खता को परदे पर उतारना. जिसमे यह दिखाया गया है की इंसान को पागल बनाना दुनिया का सबसे आसान काम है.

यह मूवी सच में काबिले तारीफ़ है जिसमे समाज के उन मुद्दों को उठाया गया है जिसमे हमारा समाज पूरी तरह से फस चुका है. और साथ ही तारीफ करनी होगी इस मूवी के डायरेक्टर सुधीर मिश्रा की जिन्होंने पॉलिटिक्स, एजुकेशन  और साइंस जैसे मुद्दों को एक साथ दिखाया है. जिसमे एक सोची हुई कहानी के अन्दर भी हमे असलियत से सामना करने के मौका मिलता है .

यह मूवी भले ही एक बाप और बेटे के संघर्ष के ऊपर बनाई गयी हो लेकिन फिर भी आप इसे अपनी फॅमिली के साथ बैठके नहीं देख सकते क्योकि इस मूवी गालियों का बहुत इस्तेमाल किया गया है और साथी इसमें कुछ अडल्ट सीन्स भी है. तो आप इसे अपनी फॅमिली के साथ ना देखे तो ही अच्छा होगा.

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